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Showing posts from November, 2018

स्वस्तिक पिरामिड

स्वस्तिक शब्द 'सु' एवं 'अस्ति' का मिश्रण है। 'सु' का अर्थ है - 'शुभ' और 'अस्ति' का अर्थ है - 'होना'। अर्थात 'शुभ हो',  'कल्याण हो'। स्वस्तिक अर्थात कुशल एवं कल्याण। हिंदू धर्म में स्वस्तिक को शक्ति, सौभाग्य, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है। हर मांगलिक कार्य में यह बनाया जाता है। स्वस्तिक का बायां हिस्सा गणेश की शक्ति का स्थान "गं" बीजमंत्र होता है। इसमें जो चार बिंदिया होती हैं, उनमें गौरी, पृथ्वी, कच्छप और अनंत देवताओं का वास होता है।                           इस मंगल-प्रतीक का गणेश की उपासना, धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी के साथ, बही-खाते की पूजा की परंपरा आदि में विशेष स्थान है। इसकी चारों दिशाओं के अधिपति देवताओं, अग्नि, इन्द्र, वरुण एवं सोम की पूजा हेतु एवं सप्तऋषियों के आशीर्वाद को प्राप्त करने में प्रयोग किया जाता है। यह चारों दिशाओं और जीवन चक्र का भी प्रतीक है। घर के वास्तु को ठीक करने के लिए स्वस्तिक का प्रयोग किया जाता है। स्वस्तिक के...

स्वस्तिक

स्वस्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति में मंगल-प्रतीक माना जाता रहा है। इसीलिए किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले स्वस्तिक चिह्व अंकित करके उसका पूजन किया जाता है। स्वस्तिक शब्द सु+अस+क से बना है। 'सु' का अर्थ अच्छा, 'अस' का अर्थ 'सत्ता' या 'अस्तित्व' और 'क' का अर्थ 'कर्त्ता' या करने वाले से है। इस प्रकार 'स्वस्तिक' शब्द का अर्थ हुआ 'अच्छा' या 'मंगल' करने वाला। 'अमरकोश' में भी 'स्वस्तिक' का अर्थ आशीर्वाद, मंगल या पुण्यकार्य करना लिखा है| व्यक्ति या जाति विशेष का नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व के कल्याण या 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना निहित है। 'स्वस्तिक' शब्द की निरुक्ति है - 'स्वस्तिक क्षेम कायति, इति स्वस्तिकः' अर्थात् 'कुशलक्षेम या कल्याण का प्रतीक ही स्वस्तिक है।स्वस्तिक में एक दूसरे को काटती हुई दो सीधी रेखाएँ होती हैं, जो आगे चलकर मुड़ जाती हैं। इसके बाद भी ये रेखाएँ अपने सिरों पर थोड़ी और आगे की तरफ मुड़ी होती हैं। स्वस्तिक की यह आकृति दो प्रकार की हो सकती है...

शालिग्राम

परिचय :- शालिग्राम भगवान विष्णु के प्रतिक मा ने  जाते  है   ।   जैसे भगवान शिव को शिवलिङ्ग के रुप मे  पूजते  है । वैसे    ही  भगवान  शालिग्राम  को भगवान विष्णु के रुप मे पुजा जाता है ।  शालिग्राम जी काले रंग के पत्थर मूर्ति  में अधिकाँश  संख्या में संपूर्ण हिन्दू वैष्णव भक्तों  के घर में पूजा जाता है । संपूर्ण  शालिग्राम में मनोरम भगवान विष्णु का चक्र , एद्दी चक्र और अगर  शालिग्राम  का  आकार पूरा गोल हो तो उसे भगवान के सुदर्शन चक्र के समान पूजा जाता है ।  शालिग्राम पूजा के समय यदि  कोई  व्यक्ति भगवान  शालिग्राम  शिला (मूर्ति )  तुलसी के पत्ते चढ़ाये तो विष्णु भगवान बहुत प्रसन्न होते हैं ।    शालिग्राम  के विभिन्न  आकार  :-    १ ) गोल हुआ तो गोपाल कृष्ण  शालिग्राम ।   २ ) मछली के आकर में मिले तो  मतस्य   शालिग्राम ।  ३) कछुआ आकार  हो तो विष्णु भगवान का कुर्म  अवतार ।  शालिग्राम...

दक्षिणावर्ती शंख

हिन्दू धर्म में पूजा स्थल पर शंख रखने की परंपरा है। शंख को बहुत ही पवित्र माना गया है। शंख कई प्रकार के होते हैं। साधारणत: मंदिर में रखे जाने वाले शंख उल्टे हाथ के तरफ खुलते हैं और बाजार में आसानी से मिल जाते हैं जबकि दक्षिणावर्ती शंख सीधे हाथ के तरफ खुलते हैं और बहुत चमत्कारी होते हैं और बहुत ही मुश्किल से मिल पाते हैं। दक्षिणावर्ती शंख एक दुर्लभ वस्तु है। ये आसानी से नहीं मिल पाता है क्योंकि दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी का स्वरुप माना जाता है। इसलिए ही ज्योतिष में बताया गया है कि दक्षिणावर्ती शंख घर में होने पर लक्ष्मी का घर में वास रहता है। तंत्र शास्त्र ने सीधे हाथ की तरफ खुलने वाले शंख को यदि पूर्ण विधि-विधान के साथ लाल कपड़े में लपेटकर अपने घर में अलग- अलग स्थान पर रखें तो हर तरह की परेशानियों का हल हो सकता है। दक्षिणावर्ती शंख को तिजोरी मे रखा जाए तो घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। इसलिए घर में शंख रखा जाना शुभ माना जाता है। वर्तमान समय में वास्तु-दोष के निवारण के लिए जिन चीजों का प्रयोग किया जाता है, उनमें से यदि दक्षिणावर्ती शंख का उपयोग किया जाए तो कई प्रकार के लाभ हो सकते है...

काळा घोड़े की नाल

काले घोड़े की नाल:-  शत्रु एवं शनि पीड़ित लोग काले घोड़े की नाल के छल्ले का प्रयोग करें तो उत्तम लाभ होता है। यह छल्ला दाहिने हाथ की बीच की (मध्यमा) उंगुली में धारण करना चाहिए। लोगों की बुरी नजर से बचने का अत्यन्त सटीक उपाय है ध्यान रखेंना चाहिए वह छल्ला एकदम शुद्व एवं प्रमाणिक होना चाहिए। तभी इसका पूर्ण लाभ मिलता है घर तथा कार्य स्थान के मुख्य दरवाजे के ऊपर अन्दर की ओर u के आकार में लगाई गई काले घोड़े के नाल उस स्थान की सभी प्रकार तांत्रिक प्रभाव जादू-टोने, नजर आदि से रक्षा करती है। तंत्र क्रियाओं में अनेक वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। काले घोड़े की नाल भी उन्हीं में से एक है। ऐसा मानते हैं कि तंत्र प्रयोग में यदि काले घोड़े की नाल का प्रयोग किया जाए तो असंभव कार्य भी संभव हो जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार वैसे तो किसी भी घोड़े की नाल बहुत प्रभावशाली होती है लेकिन यदि काले घोड़े के अगले दाहिने पांव की पुरानी नाल हो तो यह कई गुना अधिक प्रभावशाली हो जाती है।काले घोड़े की नाल एक ऐसी वास्तु है जो शनि समबधित किसी भी पीड़ा जैसे शनि की अशुभ दशा, ढैया, साढ़ेसाती शनि का कोई अशुभ योग ...

गोमती चक्र के फायदे

गो का रूप गाय के लिये माना जाता है और उसे गो भी कहा जाता है,गाय को लक्ष्मी के रूप मे भी देखा जाता है और शुक्र ग्रह का कारक भी माना जाता है। नदियों के किनारे पर जहां गाय पानी पीती है और उनके जुगाली करने वाले फ़ैन का कुछ भाग पानी मे बह जाता है और वह फ़ैन नदी मे पडने वाले छोटे छोटे भंवर मे जाने के बाद  गोल गोल घूमता रहता है कालान्तर मे उस घूमने वाली क्रिया मे नदी के पानी के अन्दर के पत्थरो रेत आदि के कण भी उस फ़ेन मे मिल जाते है और वह फ़ैन एक चक्र का रूप धारण कर लेता है वही चक्र पानी के अन्दर बैठ जाते है और पानी की बहाव और तल आदि आदि से धीरे धीरे खिसक कर तथा नदी का पानी सूखने के बाद यह नदी की रेत मे मिल जाते है यही गोमती चक्र के रूप मे जाने जाते है। इस क्रिया से आसुरी शक्तियों का घर मे रहना नही हो पाता है।गोमती चक्र की बनावट को देखा जाये तो उसके ऊपर चिकने भाग पर हिन्दी के ७ का अंक बना मिलता है,वर्तमान के ज्योतिषियों के अनुसार यह अंक राहु का अंक कहा जाता है और पानी की वस्तु जिसे चन्द्रमा का रूप दिया जाता है उसके अन्दर इस अंक के होने से यह राहु कृत प्रभावो को दूर रखने के लिये अपनी युति...

एकाक्षी नारियल

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एकाक्षी नारियल हमारी सनातन पूजा पद्धति में  श्रीफल  अर्थात् नारियल का विशेष महत्व है। हिन्दू धर्म की  कोई भी पूजा बिना श्रीफल अर्पण के पूर्ण नहीं होती। चाहे वह प्रसाद रूप में हो या भेंट के रूप  में, श्रीफल का हमारी पूजा पद्धति में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। आपको यह जानकर  आश्चर्य होगा कि सभी नारियल श्रीफल नहीं होते केवल  एकाक्षी नारियल  ही श्रीफल होता है। नारियल रेशेनुमा जड़ो का आवरण होता है | इन जड़ो को हटाने पर अधिकांश नारियलों में तीन काले बिंदु जैसी  आकृति दिखाई देती है | इनमे से दो आँख और एक मुख का परिचायक होती है | किसी किसी नारियल में एक  मुख और एक नेत्र के रूप में मात्रा दो निशान होते है उसे एकाक्षी नारियल कहते है |  इसे घर में रखना अत्यंत  शुभ माना जाता है। यद्यपि इसकी उपलब्धता दुर्लभ होती है लेकिन प्रयास करने पर यह प्राप्त हो जाता  है। 'श्री' अर्थात् लक्ष्मी, 'एकाक्षी नारियल' को साक्षात् लक्ष्मी का रूप माना गया है। यह अत्यन्त दुर्लभ होता है।  सैंकड़ों-हजारों नारियलों में कोई एक श्र...