शालिग्राम

परिचय :-

शालिग्राम भगवान विष्णु के प्रतिक माने जाते है  जैसे भगवान शिव को शिवलिङ्ग के रुप मे पूजते है। वैसे  ही भगवान शालिग्राम को भगवान विष्णु के रुप मे पुजा जाता है। शालिग्राम जी काले रंग के पत्थर मूर्ति में अधिकाँश संख्या में संपूर्ण हिन्दू वैष्णव भक्तों  के घर में पूजा जाता है। संपूर्ण शालिग्राम में मनोरम भगवान विष्णु का चक्र , एद्दी चक्र और अगर शालिग्राम  का आकार पूरा गोल हो तो उसे भगवान के सुदर्शन चक्र के समान पूजा जाता है। शालिग्राम पूजा के समय यदि कोई व्यक्ति भगवान शालिग्राम  शिला (मूर्ति)  तुलसी के पत्ते चढ़ाये तो विष्णु भगवान बहुत प्रसन्न होते हैं। 

 शालिग्राम के विभिन्न आकार :- 

 १ ) गोल हुआ तो गोपाल कृष्ण शालिग्राम 
२ ) मछली के आकर में मिले तो मतस्य  शालिग्राम। 
३) कछुआ आकार  हो तो विष्णु भगवान का कुर्म  अवतार। 

शालिग्राम पूजन विधि :-

१ ) विष्णु का प्रतीक शालिग्राम  को पूजा घर में नित्य साफ करे। 
२ ) शालिग्राम  को तुलसी पत्ते के साथ पंचामृत स्नान ( दूध , दही , चीनी , मधु और घी का मिश्रण )  करवानी चाहिये। 
३ ) जिस घर में शालिग्राम  होता है उस घर में सदैव माता लक्ष्मी का वास होता हैं। 
४ ) शालिग्राम पूजा से संपूर्ण जन्मो के पापों का नाश और भक्ति-मुक्ति दोनों मिल जाती है। 
५ ) शालिग्राम  पूजा करने से दुःख , दरिद्रता , कष्ट और शत्रुओ का विनाश होता है। 
६ ) भगवान कृष्ण और शालिग्राम समान रूप है। 
७ ) शालिग्राम  नेपाल के सिवाय दूसरी जगह नहीं मिलता है। इसलियें मंडकी मुक्तिनाथ के शालिग्राम हि शालिग्राम है। 

प्रस्तावना :-

शालिग्राम भगवान विष्णु का साक्षात स्वरूप हैं। भगवान नारायण का यह सात्विक स्वरूप मंडकी नदी से प्राप्त होता है। गंडकी बिहार और नेपाल में बहने वाली एक नदी है। इस नदी को नेपाल मे शालिग्रामि और मैदान मे नारायणी कहते है,यह पटना के निकट गंगा मे मिल जाती है। वैष्णव धर्म में भक्ति, भाव एवं विश्वास के साथ नित्य शालिग्राम की पूजा होती है। सात्विक आचार,विचार और आहार वाले लोगों के लिए शालिग्राम की पूजा,  शीघ्र उन्नतिकारक एवं शुभफलदायक होता है। जैसे शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ मात्र बिल्वपत्र चढ़ाने से शिव प्रसन्न होते हैं उसी भांति यदि कोई व्यक्ति नित्य जलाभिषेक करके शालिग्राम पर मात्र तुलसी पत्र अर्पण करता है तो इसी से भगवान नारायण शीघ्र प्रसन्न होते हैं। शालिग्राम की नित्य पूजा करने से जन्म जन्मान्तर के पाप, ताप, शाप नष्ट होते हैं। सुख, शांति एवं धन, मान, पद प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है। घर-परिवार में अशांति, कलह एवं पितृदोष भी समाप्त होता है। विशेष शुभफल की प्राप्ति के लिए विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।

ऐतिहासिकता :-

शालिग्राम का प्रसिद्ध मंदिर मुक्तिनाथ में स्थित है यह वैष्‍णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह तीर्थस्‍थान शालिग्राम भगवान के लिए प्रसिद्ध है। मुक्तिनाथ की यात्रा काफी मुश्किल है। माना जाता है कि यहां से लोगों को हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।

मुक्तिनाथ नेपाल में स्थित है। काठमांडु से मुक्तिनाथ की यात्रा के लिए पोखरा जाना होता है। वहां से यात्रा शुरू होती है। पोखरा के लिए सड़क या हवाई मार्ग से जा सकते हैं। वहां से पुन: जोमसोम जाना होता है। यहां से मुक्तिनाथ जाने के लिए आप हेलिकॉप्‍टर या फ्लाइट ले सकते हैं। यात्री बस के माध्‍यम से भी यात्रा कर सकते हैं। सड़क मार्ग से जाने पर पोखरा पहुंचने के लिए कुल 200 कि.मी. की दूरी तय करनी होती है।

आप सभी जानते हैं कि भारत भूमि ऋषियों मुनियों की भूमि रही है | हिन्दू संस्कृति बहुत ही दुर्लभ संस्कृति है इसलिए बहुत ही दुर्लभ वस्तुएं देवी देवताओं के अवतार के रूप में हमें इस भूमि पर मिली हैं | यह हम सबका परम सौभाग्य है कि एैसी ही एक वस्तु शालिग्राम शिला के रूप में भगवान विष्णु के दस अवतारों के स्वरुप में हमें मिली है |
शास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु के साक्षात स्वरुप में शालिग्राम शिला के बारे में सबसे प्रचलित कथा के अनुसार भगवान विष्णु की दोनों पत्नियों माँ सरस्वती एवं माँ लक्ष्मी जी में एक समय झगड़ा हो गया | इस झगड़े के फलस्वरूप माँ सरस्वती के श्राप के कारण से माँ लक्ष्मी जी तुलसी के रूप में सदा के लिए इस पृथ्वी पर विराजमान हो गई | भगवान विष्णु महालक्ष्मी को वापस स्वर्ग में ले जाने के लिए गण्डकी नदी में शिला के रूप में इंतज़ार करते रहे और जल में बहने के कारण से भगवान विष्णु के दसों अवतारों के चिन्ह उन शिलाओं पर आ  गए जिन्हें शालिग्राम शिला के नाम से जाना गया |
शास्त्रों के अनुसार चूँकि इस शिला में भगवान विष्णु स्वयं विराजमान हैं इसलिए इस शिला की पूजा करने से भगवान विष्णु का साक्षात आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में लगभग हर प्रकार की समस्या से मुक्ति इस शिला के पूजन से प्राप्त की जा सकती है | स्कन्दपुराण नामक ग्रन्थ के अनुसार शालिग्राम शिला एवं माँ लक्ष्मी के स्वरुप माँ तुलसी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है इसलिए माँ तुलसी और शालिग्राम का विवाह भी करवाया जाता है | जितने भी ग्रंथों में शालिग्राम शिला के बारे में विवरण आता है सभी में इसकी पूजा आराधना और उपासना करने से दिव्य फल की प्राप्ति होती है एैसा लिखा गया है अतः इस भूमि के समस्त जनों के कल्याण के लिए भगवान विष्णु के साक्षात अवतार शालिग्राम शिला के दिव्य स्वरुप को घर लाकर आदर पूर्व उनकी स्थापना करनी चाहिए और नियमित रूप से भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए |

एैसा कहा गया है जहाँ भगवान विष्णु की शालिग्राम के रूप में पूजा की जाति है वहां माँ लक्ष्मी स्वयं वास करने लगती हैं और घर में सुख समृधि, सम्पत्ति एवं धन लक्ष्मी बरसने लगती है | “ॐ नमो भगवते वासुदेवाए नमः” के जाप से भगवान विष्णु के स्वरुप शालिग्राम शिला की पूजा करनी चाहिए |


शालिग्राम के प्रकार : लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं जिनमें से 24 प्रकार को विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना गया है। ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंधित हैं। 

विभिन्न शालिग्राम के नाम :-
१ – श्री विष्णु शालिग्राम
२ – जनारदना शालिग्राम
३ – पढ़मनाभ शालिग्राम
४ – प्रजापति शालिग्राम
५ – चक्रधर शालिग्राम
६ -त्रिविक्रमा शालिग्राम
७ – नारायण शालिग्राम
८ – श्रीधर शालिग्राम
९ – गोविन्द शालिग्राम
१० – मधु सूधना शालिग्राम
११ – नारासिम्हा शालिग्राम
१२ – जलासयिना शालिग्राम
१३ – वराह शालिग्राम
१४ – रघु नन्दन शालिग्रामा
१५ – वामन शालिग्राम
१६ – माधव शालिग्राम
१७ – सन्थन गोपाल शालिग्राम
१८  – हयग्रिवा शालिग्राम
१९ – लक्ष्मी नरसिम्ह शालिग्राम
२०  – लक्ष्मी नारायण शालिग्राम
२१ – रत्न गर्व ज्योति शालिग्राम
२२  – कल्की शालिग्राम
२३ – बुद्ध शालिग्राम
२४ – परशुराम शालिग्राम
२५ – राम शालिग्राम
२६ – कृष्ण शालिग्राम
२७ – विश्वम्भर शालिग्राम
२८ – अष्ट वक्र शालिग्राम
२९ अच्युत शालिग्राम
३० – श्वेत लक्ष्मी शालिग्राम
३१ – मणि प्रभा शालिग्राम
३२  – संकर्षण शालिग्राम
३३ – नवब्युह शालिग्राम
३४ – दश अवतार शालिग्राम
३५ -प्रधुन्न शालिग्राम
३६ – पुरुषोतम शालिग्राम
३७ – अनिरुद्र शालिग्राम
३८ - सुदर्शन और सुदर्शना चक्र शालिग्रामशालिग्राम
३९ -बैकुण्ठ शिला (बैकुण्ठ शालिग्राम)
४० – केशब शालिग्राम
४१ -दामोदर शालिग्राम
चौबीस प्रकार के दिव्य शालिग्राम :-

केशवशालिग्राम , मधुसुदन शालिग्राम, संकर्षणशालिग्राम, दामोदर शालिग्राम , बासुदेवशालिग्राम ,प्रध्युम्न शालिग्राम, विष्णुशालिग्राम, माधवशालिग्राम ,अनन्त मूर्ति शालिग्राम , पुर्षोत्तम शालिग्राम , अधोक्षज शालिग्राम, जनार्दन शालिग्राम, गोविन्द शालिग्राम, त्रिविक्रम शालिग्राम, श्रीधर शालिग्राम, ऋषिकेश शालिग्राम , नृसिंहशालिग्राम, विश्व योनीशालिग्राम ,वामनशालिग्राम , नारायण शालिग्राम ,पुण्डरीकाक्षशालिग्राम,उपेन्द्र शालिग्राम ,श्री हरि शालिग्राम, और भगवान कृष्णशालिग्राम .
ये चौबिस शालिग्राम के नाम साल के सभी २४ एकादशी से मिला हुवा है और पुराण शास्त्र मे इसी तरह कहा गया है। ये शालिग्राम भगवान विष्णु के २४ एकादशी मे पुजा किया जाता है। यदि मनुष्य ने किसी भी एकादशी मे ये सभी शालिग्राम पुजा किया तो वह भक्तिवान और धर्मात्मा होता है।  यदि किसी ने शालिग्राम का नाम भी सुन लिया हो तो उसको भगवान श्री हरि कृष्ण का अनुपम प्रेम मिल जाता है।

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