एकाक्षी नारियल
हमारी सनातन पूजा पद्धति में श्रीफल अर्थात् नारियल का विशेष महत्व है। हिन्दू धर्म की
कोई भी पूजा बिना श्रीफल अर्पण के पूर्ण नहीं होती। चाहे वह प्रसाद रूप में हो या भेंट के रूप
में, श्रीफल का हमारी पूजा पद्धति में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। आपको यह जानकर
आश्चर्य होगा कि सभी नारियल श्रीफल नहीं होते केवल एकाक्षी नारियल ही श्रीफल होता है।
नारियल रेशेनुमा जड़ो का आवरण होता है | इन जड़ो को हटाने पर अधिकांश नारियलों में तीन काले बिंदु जैसी
आकृति दिखाई देती है | इनमे से दो आँख और एक मुख का परिचायक होती है | किसी किसी नारियल में एक
मुख और एक नेत्र के रूप में मात्रा दो निशान होते है उसे एकाक्षी नारियल कहते है | इसे घर में रखना अत्यंत
शुभ माना जाता है। यद्यपि इसकी उपलब्धता दुर्लभ होती है लेकिन प्रयास करने पर यह प्राप्त हो जाता
है।'श्री' अर्थात् लक्ष्मी, 'एकाक्षी नारियल' को साक्षात् लक्ष्मी का रूप माना गया है। यह अत्यन्त दुर्लभ होता है।
सैंकड़ों-हजारों नारियलों में कोई एक श्रीफल होता है। एकाक्षी नारियल अर्थात श्री फल जिसके भी पास होता है
उस पर सदैव लक्ष्मी की कृपा बानी रहती है उसे जीवन में कभी आर्थिक संकटो का सामना नहीं करना पड़ता है
एकाक्षी नारियल को तोड़ना अशुभ माना जाता है | एकाक्षी नारियल को लाल कपडे में लपेट कर सिन्दूर और
कुमकुम आदि से पूजा करनी चाहिए | जिस घर में एकाक्षी नारियल की पूजा की जाती है वह लक्ष्मी की कृपा
बानी रहती है | अन्न धन की कभी कमी नहीं आती है | व्यावसायिक प्रतिस्थानो में पूजा की जाए तो वयवसाय
में वृद्धि होती है | मान्यता है की ये नारियल साक्षात् लक्ष्मी का रूप होता है अतः इसे घर में रखने से कई प्रकार
एकाक्षी नारियल की पूजन विधि :-
एकाक्षी नारियल प्राप्त होने पर विशेष मुहूर्तों जैसे दीपावली, होली, रवि-पुष्य, गुरु-पुष्य, ग्रहण काल आदि पर
षोडषोपचार पूजा कर उसे लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान या तिजोरी में रखने या
पूजा स्थान में रखने से सदैव लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। और अगर ईनमसे से कोई शुभ मुहूर्त न हो तो
एकाक्षी नारियल को गुरूवार को स्थापित करना चाहिए पूजाघर में एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं | उस पर
एकाक्षी नारियल स्थापित करें।घी व सिन्दूर का लेप तैयार करें। उस लेप को एकाक्षी नारियल पर अच्छे से
लगाएं ध्यान रहे कि केवल आंख को छोड़कर शेष पूरे नारियल को घी मिश्रित सिन्दूर के लेप से आवेष्टित
करना है।
तत्पश्चात एकाक्षी नारियल को कलावा या मौली से लपेटकर अच्छी तरह से पूरा ढंककर लाल रेशमी वस्त्र में
बांधकर उसकी षोडषोपचार पूजा करें। पूजा के उपरान्त निम्न मंत्र की कम से कम 11 माला कर एकाक्षी
नारियल को सिद्ध करें।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं महालक्ष्मी स्वरूपाय एकाक्षी नारिकेलाय नम
एकाक्षी नारियल के कुछ उपाय एवं लाभ
1- गर्भवती स्त्री यदि प्रसव के पूर्व एकाक्षी नारियल को सूंघे तो प्रसव आसानी से होता है।
2- जिस घर में एकाक्षी नारियल की पूजा होती है, उस घर के लोगों पर तांत्रिक क्रियाओं का प्रभाव नहीं होता
है। 3- यदि मुकद्में में विजय प्राप्त करनी हो तो रविवार के दिन एकाक्षी नारियल पर विरोधी का नाम लिख कर
उस पर लाल कनेर का फूल रख दें और जिस दिन न्यायालय जाएं वह फूल साथ ले जाएं। फैसला आपके पक्ष
में होगा।
4- जिस घर में एकाक्षी नारियल होता है वहां स्वयं लक्ष्मी वास करती हैं एवं उस परिवार के सदस्यों को मान-
सम्मान, प्रतिष्ठा व यश प्राप्त होता है।
5- वन्ध्या स्त्री(जिसे संतान न हो रही हो) ऋतु स्नान के बाद एकाक्षी नारियल को धो कर उसका पानी पिलाया
जाए तो संतान होने की संभावना बढ़ जाती है।
6 चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण के दिन रात्रि में एक एकाक्षी नारियल पर कुंकुम लगाकर, लाल कपड़े में सात
गोमती चक्र के साथ बांधक तिजोरी में रखें। प्रत्येक पूर्णिमा को इसे गुग्गुल की धूप दें। घर में चमत्कारिक रूप
से सुख-समृद्धि आने लगती है।
7 यदि परिवार का कोई व्यक्ति बीमार चल रहा है तो कृष्णपक्ष की अष्टमी के दिन सायंकाल में उसके सिर से
21 बार एकाक्षी नारियल घुमाकर बहते जल में प्रवाहित करें। धीरे-धीरे रोगी ठीक होने लगता है।
8 .नवग्रहों की शांति के लिए भी एकाक्षी नारियल लाभकारी सिद्ध होगा। यदि आप अपनी कुंडली के किसी भी
ग्रह के कारण परेशानियों से जूझ रहे हैं तो आपके लिए एकाक्षी नारियल एकमात्र चमत्कारिक उपाय है।
9 .जिन युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा है। वे लगातार तीन गुरुवार एकाषी नारियल को पीले पुष्प के
साथ बहते जल में प्रवाहित करें। शीघ्र ही विवाह का प्रस्ताव प्राप्त होगा और योग्य जीवनसाथी मिलेगा।
10 . किसी व्यक्ति की बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हों तो उसे किसी भी माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी को एक
एकाक्षी नारियल लेकर उसे अपने सिर से सात बार घुमाकर बहते जल में प्रवाहित करे

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